Monday, December 31, 2018

1 जनवरी 1948, जब हुआ था आज़ाद भारत का 'जलियांवाला बाग़ कांड'

भारत की आज़ादी के करीब पांच महीने बाद जब देश एक जनवरी, 1948 को आज़ादी के साथ-साथ नए साल का जश्न मना रहा था तब खरसावां 'आज़ाद भारत के जलियांवाला बाग़ कांड' का गवाह बन रहा था.

उस दिन साप्ताहिक हाट का दिन था. उड़ीसा सरकार ने पूरे इलाक़े को पुलिस छावनी में बदल दिया था. खरसावां हाट में करीब पचास हज़ार आदिवासियों की भीड़ पर ओडिसा मिलिट्री पुलिस गोली चला रही थी.

आज़ाद भारत का यह पहला बड़ा गोलीकांड माना जाता है. इस घटना में कितने लोग मारे गए इस पर अलग-अलग दावे हैं और इन दावों में भारी अंतर है.

वरिष्ठ पत्रकार और प्रभात ख़बर झारखंड के कार्यकारी संपादक अनुज कुमार सिन्हा की किताब 'झारखंड आंदोलन के दस्तावेज़: शोषण, संघर्ष और शहादत' में इस गोलीकांड पर एक अलग से अध्याय है.

ये भी पढ़ेंः झारखंड: क्यों चर्चा में है विकलांगों का ये समूह

इस अध्याय में वो लिखते हैं, "मारे गए लोगों की संख्या के बारे में बहुत कम दस्तावेज़ उपलब्ध हैं. पूर्व सांसद और महाराजा पीके देव की किताब 'मेमोयर ऑफ ए बायगॉन एरा' के मुताबिक इस घटना में दो हज़ार लोग मारे गए थे."

"देव की किताब और घटना के चश्मदीदों के विवरणों में बहुत समानता दिखती है. वहीं तब के कलकत्ता से प्रकाशित अंग्रेजी अख़बार द स्टेट्समैन ने घटना के तीसरे दिन अपने तीन जनवरी के अंक में इस घटना से संबंधित एक खबर छापी, जिसका शीर्षक था- 35 आदिवासी किल्ड इन खरसावां."

"अखबार ने अपनी रिपोर्ट में लिखा कि खरसावां का उड़ीसा में विलय का विरोध कर रहे तीस हजार आदिवासियों पर पुलिस ने फायरिंग की. इस गोलीकांड की जांच के लिए ट्रिब्यूनल का भी गठन किया गया था, पर उसकी रिपोर्ट का क्या हुआ, किसी को पता नहीं."

कुएं में लाशें भर दी गई
झारखंड आन्दोलनकारी और पूर्व विधायक बहादुर उरांव की उम्र घटना के वक़्त करीब आठ साल थी. खरसावां के बगल के इलाके झिलिगदा में उनका ननिहाल है. सबसे पहले उन्होंने बचपन में ननिहाल जाने पर खरसावां गोलीकांड के बारे में सुना और फिर आन्दोलन के क्रम में इसके इतिहास से रूबरू हुए.

उन्होंने बीबीसी को बताया, "गोलीकांड का दिन गुरुवार और बाजार-हाट का दिन था. सराइकेला और खरसावां स्टेट को उड़िया भाषी राज्य होने के नाम पर उड़ीसा अपने साथ मिलाना चाहता था और यहाँ के राजा भी इसे लेकर तैयार थे. मगर इलाके की आदिवासी जनता न तो उड़ीसा में मिलना चाहती थी और न बिहार में."

झारखंड: 323 करोड़ के विज्ञापन ख़र्च पर घिरी रघुवर सरकार

झारखंड की इन औरतों को क्यों चुभता है अफ़ग़ानिस्तान

"उसकी मांग अलग झारखंड राज्य की थी. झगड़ा इसी बात को लेकर था. ऐसे में पूरे कोल्हान इलाके से बूढ़े-बुढ़िया, जवान, बच्चे, सभी एक जनवरी को हाट-बाज़ार करने और जयपाल सिंह मुंडा को सुनने-देखने भी गए थे. जयपाल सिंह अलग झारखणंड राज्य का नारा लगा रहे थे. जयपाल सिंह मुंडा के आने के पहले ही भारी भीड़ जमा हो गई थी और पुलिस ने एक लकीर खींच कर उसे पार नहीं करने को कहा था."

नारेबाजी के बीच लोग समझ नहीं पाए और अचानक गोली की आवाज़ आई. बड़ी संख्या में लोग मारे गए. अभी जो शहीद स्थल है वहां एक बहुत बड़ा कुआं था. यह कुआं वहां के राजा रामचंद्र सिंहदेव का बनाया हुआ था. इस कुएं को न केवल लाश बल्कि अधमरे लोगों से भर दिया गया और फिर उसे ढंक दिया गया."

शीनगन गाड़ कर लकीर खींची गई

लकीर खींचने की बात की तस्कीद खरसावां में रहने वाले रजब अली भी करते हैं, जिनकी उम्र गोलीकांड के वक़्त करीब पंद्रह साल थी. गोलीकांड के दिन उन्होंने सभा के लिए लोगों को इकट्ठा होते देखा था. अभी एक समाजसेवी के बतौर जाने जाने वाले रजब अली से मेरी मुलाकात खरसावां चौक पर हुई.

Thursday, December 27, 2018

छपाक में ब्रांड नेम के साथ 12 करोड़ भी लगा रहीं दीपिका पादुकोण, मार्च से होगी शूटिंग

पहले के दौर में स्टार्स एक्टिंग की इनिंग पूरी होने पर बतौर प्रोड्यूसर फिल्म मेकिंग में दस्तक देते थे। अब ऐसा नहीं रहा। वे दोनों काम साथ-साथ कर रहे हैं। दीपिका पादुकोण भी इसी तर्ज पर चलते हुए एिक्टंग करियर के साथ प्रोड्यूसर की अपनी पारी भी खेलने की तैयारी में हैं, बस उनका तरीका बाकी स्टार्स के तरीके से थोड़ा अलग है।

बाकी स्टार्स की तरह वह केवल अपना ब्रांड नेम देकर ही को-प्रोड्यूसर का क्रेडिट नहीं लेना चाहतीं, बल्कि रकम का डायरेक्ट इनवेस्टमेंट कर रही हैं। अपने पहले प्रॉडक्शन वेंचर छपाक में वह ऐसा ही कर रही हैं। फिल्म से जुड़े सूत्रों ने बताया कि उनका इसमें तकरीबन 12 करोड़ इनवेस्ट हो रहा है। बाकी की रकम फॉक्स स्टार इंडिया वाले लगाएंगे। मार्केटिंग और मैन पावर इसी कंपनी का होगा। रकम से जुड़ी और ज्यादा जानकारियां कन्फर्म करने के लिए संबंधित स्टार्स के पीआर पर्सन्स को संपर्क किया गया, मगर उन्होंने  इसकी आधिकारिक पुष्टि नहीं की।

बड़े स्टार्स को-प्रोड्यूसर का क्रेडिट लेते हुए फिल्म को सिर्फ अपना ब्रैंड नेम देते हैं। फिल्म से उनका नाम जुड़ते ही प्रोड्यूसर और फाइनेंसर बोर्ड पर आ जाते हैं और फंड जुटाना आसान हो जाता है।

कई और एक्ट्रेसेस भी बनी प्रोड्यूसर
अनुष्का शर्मा, चित्रांगदा सिंह, प्रियंका चोपड़ा, तापसी पन्नू, रिचा चड्ढा और नीतूचंद्रा व अन्य कई एक्ट्रेसेस भी प्रोड‌्यूसर बन चुकी हैं।

सबके अलग तरीके
अनुष्का शर्मा: बतौर प्रोड्यूसर इनका तरीका बिल्कुल अलग है। अपने खर्च पर फिल्म बना आगे स्टूडियो को आउटराइट डील बेचती हैं। जैसा उन्होंने ‘फिल्लौरी’ के साथ किया था। ट्रेड पंडितों के मुताबिक, इसमें अनुष्का के 17 से 18 करोड़ लगे थे।

अजय देवगन: अजय देवगन प्रोड्यूसर के तौर पर इनवेस्ट करते रहे हैं। उनके दूसरे साझीदार फॉक्स, इरॉस, वायकॉम जैसे कॉरपोरेट स्टूडियोज होते हैं। फिल्म में मेजर मनी उनकी लगती है। ‘तानाजी’ में प्राइमरी इनवेस्टमेंट किया है। बाकी खर्च टी-सीरिज वालों का हो रहा है।

अक्षय कुमार: को-प्रॉडक्शन में सिर्फ ब्रैंड नेम देते रहे हैं, पैसे नहीं लगाते। केसरी में अक्षय का पैसा नहीं लगा है। इसमें करण जौहर मेन प्रोड्यूसर हैं।

इमरान हाशमी: आने वाली फिल्म चीट इंडिया में उनका सिर्फ कंटेंट सपोर्ट है। उनका पैसा फिल्म में नहीं लगा है।

Tuesday, December 18, 2018

दुनियाभर में महिला-पुरुषों के बीच आर्थिक बराबरी में 202 साल लग जाएंगे

दुनियाभर में कार्यस्थल पर महिलाओं को पुरुषों की बराबरी तक पहुंचने में 202 साल लग जाएंगे। वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की मंगलवार को जारी ग्लोबल जेंडर गैप रिपोर्ट में यह बात सामने आई। इसके मुताबिक वेतन समेत आर्थिक अवसरों के मामलों में महिलाओं और पुरुषों की स्थिति में भारी अंतर है।

टॉप-10 देशों में एशिया से सिर्फ फिलीपींस शामिल
रिपोर्ट के मुताबिक राजनीति, हेल्थ और एजुकेशन में महिला-पुरुष असमानता की स्थिति में इस साल में सुधार हुआ है। लेकिन, इन क्षेत्रों में समानता का लक्ष्य पाने में 108 साल लग जाएंगे। क्योंकि, एक साल के अंदर स्थिति में 0.1% से भी कम सुधार हुआ है। पिछले साल महिला-पुरुषों की उपलब्धियों और वेलफेयर में फासला बढ़ गया था। दस साल में पहली बार ऐसा हुआ था।

महिला-पुरुष समानता में आइसलैंड 85.8% स्कोर के साथ लगातार 10वें साल पहले नंबर पर रहा है। महिलाओं के राजनीतिक सशक्तिकरण में भी यह टॉप पर है। हालांकि, यहां जनप्रतिनिधि, सीनियर अफसर और मैनेजर के तौर पर महिलाओं के प्रतिनिधित्व में गिरावट आई है।

149 देशों की लिस्ट में भारत 108वें नंबर पर
महिला-पुरुष समानता के मामले में दुनिया में भारत 66.5% स्कोर के साथ 108वें नंबर पर है। राजनीतिक सशक्तिकरण में देश में महिला-पुरुषों की  स्थिति में करीब 40% फासला है।

वर्ल्ड इकोनॉमिक फोरम की रिपोर्ट के मुताबिक दुनिया भर में मैनेजर स्तर के पदों पर सिर्फ 34% महिलाएं हैं। महिला-पुरुषों के वेतन में 63% अंतर है। मिडिल ईस्ट और नॉर्थ अफ्रीका की परफॉर्मेंस सबसे खराब है।

यूएन वूमेन की रीजनल डायरेक्टर अन्ना-करिन जेटफोर्स का कहना है कि दुनियाभर में ऐसा कोई देश नहीं जिसने पूरी तरह महिला-पुरुष के बीच समानता का लक्ष्य हासिल कर लिया हो। लैंगिक असमानता दुनिया की सच्चाई है। महिलाओं की जिंदगी से जुड़े हर पहलू में यह दिखाई दे रहा है। महिला-पुरुष के बीच आर्थिक समानता हासिल करने के लिए 202 साल का वक्त बहुत ज्यादा है।

एशिया में फिलीपींस की परफॉर्मेंस सबसे अच्छी है। ग्लोबल इंडेक्स में इसका आठवां नंबर है। शिक्षा, राजनीति और वेतन के मामले में यहां महिला-पुरुषों में समानता बाकी एशियाई देशों से ज्यादा है।

एशियाई देशों में दूसरा नंबर लाओस का है। लेकिन, फिलीपींस के काफी नीचे है। ग्लोबल इंडेक्स में लाओस का 26वां, सिंगापुर और 67वां और चीन का 103वां नबर है।

Tuesday, December 11, 2018

台湾知名面包师吴宝春因“统独面包”引风波

曾获得世界冠军的台湾知名面包师傅吴宝春,首间大陆门市下周二(18日)将在上海正式开业,却被大陆网友称为“台独面包”。吴宝春10日发表声明表示出生于中国台湾,支持“九二共识”,掀起风波。

“吴宝春麦方店”在台湾共有四间分店, 上海分店12月7日试营运,18日正式营业。但近日吴宝春在脸书上发表声明,表示自己是中国台湾的面包师,“身为中国人是我的骄傲,‘两岸一家亲’是我坚持不变的态度”,并强调“支持九二共识”,响应国台办的措施“为海峡两岸的经贸交流尽棉薄之力”。

冠军面包师吴宝春是谁?

冠军面包师傅吴宝春在台湾享有非常高的知名度,2010年他代表台湾参加法国世界面包比赛时夺得冠军。当时参赛的面包,使用台湾食材,如彰化荔枝或原住民小米酒,因此大受欢迎,擦亮“台湾面包”的招牌。

吴宝春的出身也非常激励人心,他来自台湾屏东、是单亲家庭的小孩,国中毕业时到台北闯荡,从学徒做起,天天揉面团,奋斗的故事还被导演林正盛相中,拍成电影《世界第一麦方》,跃上大萤幕

2013年,原本想报考台湾的大学的硕士学位,却因资格不符被拒绝,但新加坡大学最后跨海面试,并录取吴宝春。当时台湾总统马英九还要求教育部要将吴宝春留在台湾,但没有成功。吴宝春之后的事业越做越大,如今却被贴上”台独“标签,不得不发表“九二共识”。也使得曾经站上世界舞台的他,事业面临严重考验。

亲台或倾中:选边站后可能两边不讨好
吴宝春的这则声明,起因为2016年他接受台湾媒体《民报》采访时曾提及,“中国巿场虽然有13亿,但全世界有70多亿,我不会把眼光只看在中国”。这番言论遭大陆网友解读为“看不起中国”,并称吴宝春为台独份子,更扬言抵制“台独面包”,并把他的面包名称改成“大陆人傻钱多包”、“饿死不来大陆包”等嘲讽名字。

吴宝春为了平息争论而在开幕前夕,发表“身为中国人声明”,并强调,自己从未发表过“饿死也不会来大陆”的言论,试图消弭争议。他的声明却也引发台湾网友的不满,纷纷涌进面包店的官方脸书粉丝团留言,“台湾好吃的面包还有很多,慢走不送!”甚至扬言拒买吴宝春的面包。

事实上,对两岸关系表明立场,俨然成为台湾企业在大陆展店无法避免的问题。类似事件今年8月才发生。当时台湾总统蔡英文过境美国,拜访台湾咖啡连锁店85度C,导致该咖啡店遭批为台独企业,大陆网友抵制拒买,多家大陆网路外卖平台将85度C下架,逼迫85度C表态,指该公司坚定支持“九二共识”及两岸一家亲信念,对于“台湾当局领导人”来访,是店员拿吉祥物给蔡英文签名,作私人留念,并非店家准备大礼包。

国际观察:《板门店宣言》签署两年 韩国展铁路合作“雄心”

  27日是《板门店宣言》签署两周年。 英国首相约 色情性&肛交集合 翰逊在感染新型冠 色情性&肛交集合 状病毒康复两 色情性&肛交集合 周后, 色情性&肛交集合 将回到唐宁街继续 色情性&肛交集合 他的全职 色情性&肛交集合 领导工作。 在首相生病期 色情性&肛交集合 间...